इस संसार में इस प्रकृति में तीन गुणों का परिवेश है रजस तमस और स्तव ! संसार के निमित रूप से चलने के लिए इन तीनो का संतुलन अनिवार्य है ! भगवन का त्रिशूल गुणों का प्रतीक है ! रजस तमस और स्तव गुण कैसे होते है और क्या होते है !
प्रकाश ऊर्जा क्रोध आवेश गति परिवर्तन आकांशा यह सब राजस्क गुणों के उद्धरण है जन्म भी राजस गुण है और बालपन भी उसी प्रकार अहंकार अज्ञानता आलोचना इर्षा दुवेश मृत्यु विरद्धावस्ता यह सब तामसिक गुणों के प्रतीक है ! जैसा तुम देख सकते हो इन दोनों में संतुलन बनाए रखना संसार के कल्याण के लिए अनिवार्य है और उसके लिए अनिवार्य है इनके समक्ष एक तीसरा गुण होना इस लिए उत्पति हुए है सात्विक गुण की शुद्धता जगत कल्याण के लिए समर्पण पवित्रता समर्पण यौवन परिश्रम विकास निरंतरता सत्य आत्मविश्वास आध्यात्मिक ज्ञान में रूचि और संसार में समानता ये सब सात्विक गुण के लक्षण है !
अब प्र्शन यह की भगवान शिव पर भस्म क्यों होती है ! इसका उतर यह है मृत्यु के बाद देह जलने से सब कुछ भस्म नहीं होता केवल भस्म रह जाती है और यही बनती है प्रतीक हमारी आत्मा जो नश्वर है शाश्वत है
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